अध्याय 4 बीज चिकित्सा
बीज चिकित्सा
बीज चिकित्सा (Seed Therapy) Sujok Therapy की एक अत्यंत सरल, सस्ती और प्रभावशाली विधि है। इस तकनीक में विभिन्न प्रकार के बीजों का उपयोग कर हाथ और पैर पर स्थित बिंदुओं को उत्तेजित किया जाता है।
बीजों में प्राकृतिक ऊर्जा (प्राणशक्ति) होती है जो जब सही बिंदु पर लगाई जाती है, तो वह अंग विशेष की ऊर्जा को पुनर्संतुलित कर देती है और रोग से मुक्ति में सहायक होती है।
प्रमुख उपयोग किए जाने वाले बीज:
| बीज का नाम | उपयोग | गुण |
| मेथी (Fenugreek) | सूजन, दर्द | गर्म ऊर्जा |
| काली मिर्च (Black Pepper) | सर्दी, जुकाम, वात | तीव्र ऊर्जा |
| मूंग दाल (Green Gram) | कमजोरी, थकावट | शीतल ऊर्जा |
| अजवाइन (Carom Seeds) | अपच, गैस | तीव्र और गर्म |
| चना (Bengal Gram) | जोड़ों का दर्द | स्थिर ऊर्जा |
बीज लगाने की विधि:
- संबंधित बिंदु (Correspondence Point) को पहचानें।
- बीज को टेप (surgical tape या micropore) से उस बिंदु पर लगाएं।
- 6–8 घंटे के लिए बीज लगाए रखें।
- यदि आवश्यक हो तो रातभर भी लगाया जा सकता है।
- हर दिन बीज बदलें — पुराने बीज दोबारा न लगाएं।
सावधानियां:
- बीज को बहुत कसकर न बांधें, वरना लालिमा या खुजली हो सकती है।
- किसी भी बीज से एलर्जी हो तो उसका प्रयोग न करें।
- छोटे बच्चों में बीज कम समय के लिए लगाएं (2-4 घंटे)।
बीज चिकित्सा के लाभ:
- बिना दवा के उपचार
- घर पर ही आसानी से करें
- शरीर की ऊर्जा प्रणाली को पुनः सक्रिय करता है
- किसी भी उम्र में उपयोग संभव
